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नए अध्ययन से पता चलता है कि बादाम खाने से हृदय संबंधी स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर होता है

अनुसंधान से पता चलता है कि नाश्ते में बादाम लेने से हृदय रोग के समायोजित जोखिम को तकरीबन 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।



मई, 2020 – कई दशकों तक, शोधकर्ताओं ने जांच की है कि बादाम का सेवन किस तरह हृदय को सेहतमंद बनाता है और अब, बादाम के फायदों से जुड़ी एक अनूठी खोज सामने आई है। एक नये प्रकाशित अध्ययन[1] के मुताबिक नाश्ते में बादाम खाने से एंडोथेलियल गतिविधि में सुधार होता है, जोकि वैस्‍कुलर हेल्‍थ (नाड़ी संबंधी स्‍वास्‍थ्‍य) का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। इसके अलावा, सामान्‍य नाश्ते के बजाय बादाम का सेवन करने से "बैड" एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल कम होता है। पिछले शोध में भी यह बात सामने आई थी। इस अध्ययन की फंडिंग ऑमंड बोर्डऑफ कैलिफोर्निया द्वारा की गई थी।


यह अध्ययन छह हफ्ते के रैंडमली कंट्रोल और समानांतर ढंग से किया गया परीक्षण था। इसमें प्रतिभागियों (हृदय रोगों के जोखिम होने के ज्यादा औसत वाले) के एक समूह ने बादाम और दूसरे समूह ने उतनी ही कैलोरी का नियंत्रित नाश्ता किया, जोकि प्रत्येक प्रतिभागी की रोज की अनुमानित ऊर्जा जरूरतों का 20 फीसदी था। रिसर्च टीम ने तब दोनों समूहों के बीच कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य संकेतकों की तुलना की। उन्होंने पाया कि नियंत्रित समूह की तुलना में बादाम खाने वाले समूह में एंडोथेलियम पर निर्भर वैसोडिलेशन में 4 फीसदी यूनिट वृद्धि (प्रवाह मध्यस्थता फैलाव या एफएमडी के माध्यम से मापी गई) हुई थी, जो कि एथेरोस्क्लेरोसिस (एक ऐसी बीमारी जिसमें व्यक्ति की धमनियों के भीतर प्लाक बनने लगता है) की शुरुआत और प्रगति का एक स्पष्ट संकेत है। बेहतर एफएमडी का मतलब है कि रक्‍त के प्रवाह में वृद्धि की प्रतिक्रिया में धमनियां ज्यादा आसानी से फैल सकती हैं। यह हृदय के स्वास्थ्य का एक मजबूत संकेतक है।


नियंत्रण समूह की तुलना में बादाम समूह में एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल का स्तर घट गया। लिवर फैट और कई अन्य मापों (ट्राइग्लिसराइड्स, एचडीएल-कोलेस्ट्रॉल, ग्लूकोज, इंसुलिन और अन्य) में दोनों समूहों के बीच कोई फर्क नहीं था।


किंग्स कॉलेज लंदन में पीएचडी, को-प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर और न्यूट्रिशनल साइंस में रीडर डॉ. वेंडी हाल कहती हैं “इस अध्ययन से पता चलता है कि हममें से ज्यादातर लोग अमूमन जो नाश्ता करते हैं (जैसे- क्रिस्प, बिस्कुट और पेस्ट्री), उसके बजाय बादाम का सेवन बैड एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी लाकर और धमनियों को सेहतमंद बनाकर हमारे हृदय के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित होता है। हृदय रोग (सीवीडी) के जोखिम के मौजूदा आंकड़ों के आधार पर हमारा यह अनुमान है कि सामान्य नाश्ते की जगह अगर बादाम का सेवन किया जाए, तो लंबे समय में इसका नतीजा हृदय रोगों के तुलनात्मक समायोजित जोखिम में 30 प्रतिशत की कमी के रूप में दिखेगा।” तुलनात्मक समायोजित जोखिम किसी अन्य व्यक्ति की तुलना में एक व्यक्ति में होने वाली किसी घटना की संभावना है, जोकि रोग को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाता जैसेकि अपनी डाइट में बदलाव करना।


मैक्स हेल्थकेयर में डायटेटिक्स की रीजनल हेड रितिका समद्दर, दिल्ली अध्ययन के बारे में कहती हैं, “इस अध्ययन के निष्कर्ष खासकर भारत जैसे देश के लिए बेहद अनुकूल हैं, जहां हृदय रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। इस अध्ययन से पता चलता है कि बादाम की खपत किस तरह धमनियों में प्रवाह (एफएमडी) को बेहतर बनाने में मदद करती है, जो किसी भी व्यक्ति के हृदय के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। भोजन के बीच के अंतरालों में हम जो नाश्ता करते हैं, उसकी गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करते हुए हानिकारक चीजों की जगह भुने हुए बादाम को शामिल कर बड़ी आसानी से एंडोथेलियल गतिविधि और कार्डियक ऑटोनॉमिक गतिविधि पर फायदेमंद असर हो सकता है। साथ ही एलडीएल कोलेस्ट्रॉल भी कम किया जा सकता है और इस तरह सीवीडी के जोखिम को उल्‍लेखनीय रूप से कम कर सकते हैं।”


बादाम खाने वाले समूह में धमनियों में बेहतर प्रवाह (एफएमडी) संबंधी नई खोज के अलावा, अध्ययन ने प्रयोग में लाए गए तुलनात्मक भोजन के लिए एक इनोवेटिव नजरिया अपनाया है। शोधकर्ताओं ने बड़े ध्यानपूर्वक एक नियंत्रित भोजन तैयार किया। इसमें फैट और शुगर की मात्रा (14 फीसदी ऊर्जा सैचुरेटेड फैट से और 23 फीसदी ऊर्जा शुगर से) यूनाइटेड किंगडम के परंपरागत नाश्ते (फलों के बगैर) को प्रतिबिंबित करती है। यह आंकड़े यूनाइटेड किंगडम डाइट एंड न्यूट्रीशन सर्वे (एनडीएनएस) से लिए गए हैं। इस तटस्थ और तुलनात्मक नाश्ते से यह निर्धारित करने में मदद मिली कि स्वास्थ्य संकेतकों में जो सकारात्मक बदलाव देखने को मिले, उनकी वजह केवल बादाम थे।


अध्‍ययन पर एक नजर :


अध्ययन


 


• इस रैंडमाइज्‍ड, नियंत्रित व समानांतर डाइटरी हस्तक्षेप वाले अध्ययन ने सीवीडी के औसत से ज्यादा जोखिम वाले वयस्कों में कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम कारकों पर बादाम के सेवन के प्रभावों की जांच की। अध्ययन में बादाम के प्रभाव को यूनाइटेड किंगडम के एक वयस्क के औसत नाश्ते के बराबर कैलोरी व कार्बोहाइड्रेट/फैट/प्रोटीन उपलब्ध कराने के लिए तैयार किए गए एक नियंत्रित डाइट की तुलना में देखा गया।


 


• 30-70 वर्ष के वयस्कों ने (n = 51 बादाम समूह में, n = 56 नियंत्रण समूह में) अपने-अपने समूहों में छह हफ्तों तक अपनी कैलोरी जरूरतों का 20 फीसदी हिस्सा भुने हुए बादामों या नियंत्रित डाइट से पूरा किया। कार्डियोमेटोबॉलिक जोखिम कारकों को मापा गया, जिसमें एंडोथेलियल फंक्शन (फ्लो-मेडिएटेड डिलेशन), लिवर फैट, कोलेस्ट्रॉल लेवल और ट्राइग्लिसराइड्स, ग्लूकोज, इंसुलिन प्रतिरोध, इंसुलिन प्रतिरोध से संबंधित हार्मोन और ब्‍लड शुगर रेगुलेशन (लेप्टिन, एडिपोनेक्टिन, रेसिस्टिन) सहित ब्‍लड लिपिड और अन्य ज्ञात सीवीडी जोखिम कारक शामिल हैं।


 


• अध्ययन शुरू करने से पहले, यह सुनिश्चित करने के लिए 3 सप्ताह का परीक्षण किया गया था कि नियंत्रित भोजन का लिपिड, रक्तचाप और शरीर के वजन / संरचना पर एक तटस्थ प्रभाव पड़े।


 


परिणाम


• नतीजे बताते हैं कि सामान्य नाश्ते की जगह बादाम को शामिल करने से एंडोथेलियल गतिविधि, कार्डियक ऑटोनोमिक फंक्शन में सुधार हो सकता है और एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम किया जा सकता है।


 


• नियंत्रित आहार की तुलना में बादाम, एंडोथेलियम-निर्भर वैसोडिलेशन (माध्य अंतर माप की 4.1 फीसदी इकाइयां, 95 फीसदी सीआई 2.2, 5.9) को बढ़ाते हैं


 


• नियंत्रित समूह की तुलना में बादाम समूह में प्लाज्मा एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल सांद्रता में कमी देखी गई (माध्य अंतर -0.25 मि.मोल / एल, 95% सीआई -0.45, -0.04)।


 


• बादाम समूह में नियंत्रित समूह की तुलना में लॉन्ग-फेज़ हृदय की दर परिवर्तनशीलता पैरामीटर, बहुत कम आवृत्ति की शक्ति में रात के समय में वृद्धि हुई थी (माध्य अंतर 337 एमएस 2, 95फीसदी सीआई 12, 661)। यह अधिक पैरासिम्पेथेटिक विनियमन का संकेत देता है।


 


• पहले किए गए अध्ययनों से मिले आंकड़ों के आधार पर, इस रोग-मुक्त आबादी में सामान्य नाश्ते की जगह बादाम दिए जाने से छह सप्ताह में देखे गए बदलाव, अगर लंबे समय तक जारी रखे जाएं , तो उनमें हृदय रोग संबंधी समायोजित तुलनात्मक जोखिम में 32 फीसदी की कमी का अनुमान लगाया जा सकेगा। यह अनुमान उस आबादी की तुलना में है, जिसने अपने सामान्‍य स्‍नैक्‍स की जगह बादाम को शामिल नहीं किया है।


• समूहों के बीच लिवर फैट में कोई फर्क नहीं थे। इसके अलावा, दोनों समूहों में ट्राइग्लिसराइड्स, एचडीएल-कोलेस्ट्रॉल, ग्लूकोज, इंसुलिन प्रतिरोध, लेप्टिन, एडिपोनेक्टिन, रेसिस्टिन, लिवर फंक्शन एंजाइम, भ्रूण-ए, शरीर की संरचना, अग्नाशय वसा, इंट्रामायोसेल्युलर लिपिड, फेकल शॉर्ट चेन फैटी एसिड, रक्तचाप या 24 घंटे की हृदय गति परिवर्तनशीलता में कोई फर्क नहीं थे। । बादाम समूह में नॉन-एचडीएल कोलेस्ट्रॉल कम हो गया और एचडीएल-कोलेस्ट्रॉल पहले जैसा बना रहा।


अध्ययन की सीमाएं :


अध्ययन की सीमाएं इस तथ्य में निहित थीं कि आधार स्तर पर समूहों के बीच कार्डियोमेटाबोलिक रोग जोखिम कारकों में कुछ अंतर मौजूद थे। लिंगा आधारित भर्ती में असंतुलन का मतलब यह हो सकता है कि नतीजे सभी पुरुषों पर लागू न हो सकें। इसकी वजह यह थी कि वे रैंडमाइज्‍ड अध्ययन आबादी का केवल 30फीसदी थे। इसके अलावा, यह तथ्य भी है कि प्रतिभागियों को खुला छोड़ा गया था। हालांकि बादाम के सेवन की पुष्टि की गई थी। लेकिन यह मुमकिन है कि उनके रिपोर्ट किए गए भोजन के सेवन में कुछ त्रुटियां रही हों।


 


निष्कर्ष :


एंडोथेलियल फ़ंक्शन और एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार की डिग्री बताती है कि बादाम को सामान्य नाश्ते से प्रतिस्थापित (कुल कैलोरी का 20फीसदी, लगभग 2.5 सर्विंग या 70 ग्राम के बराबर) करने से समायोजित सापेक्ष सीवीडी जोखिम में 32 फीसदी की कमी लाने की क्षमता है। सामान्य नाश्ते की जगह बादाम के सेवन से दैनिक पोषण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और हृदय के स्वास्थ्य के सुधार में इसकी भूमिका हो सकती है।


यह नया अध्ययन हृदय के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बादाम के प्रभावों को लेकर वर्षों से किए जा रहे अनुसंधानों का समर्थन करता है। इस अध्ययन में हृदय के लिए हेल्‍दी डाइट प्‍लांस में बादाम को शामिल करने के लिए और अधिक प्रमाण प्रदान करने हेतु एक व्यवस्थित समीक्षा और सूक्ष्म विश्लेषण को शामिल किया गया है।[2] बादाम से फाइबर मिलता है (12.5 / 3.5 ग्राम प्रति 100 ग्राम / 28 ग्राम सेवारत) और इसके अलावा (प्रति 100 ग्राम / 28 ग्राम सर्विंग): मैग्नीशियम (270/76 मिलीग्राम), पोटेशियम (733/205 मिलीग्राम), और विटामिन ई (25.6 / 7.2) मिलीग्राम) समेत 15 आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।


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