देश में कोरोना के चलते श्मशानों तथा कब्रिस्तानों के बदतर हो रहे हालातों पर Troopel.com ने छेड़ी मुहीम

इन दिनों कोरोना के चलते श्मशानों तथा कब्रिस्तानों के लगातार बद से बदतर हो रहे हालातों को देखते हुए देश के तेजी से उभरते ऑनलाइन न्यूज कम व्यूज प्लेटफॉर्म Troopel.com ने इनमें सुधार लाने की पहल की है। चैनल लगातार ऑनलाइन पोल चला रहा है, जिसका जनता से भरपूर समर्थन मिल रहा है। कोरोना के नाम पर इंसानों और उनके जज्बातों के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है। कहीं 15 दिन पुरानी लाश परिजनों को दी जा रही है, कहीं बिना परिजनों को बताए ही उस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। 


इन विषयों पर प्रकाश डालते हुए चैनल के को-फाउंडर अतुल मलिकराम बताते हैं कि कोरोना के चलते देश के तमाम श्मशानों तथा कब्रिस्तानों के हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते ही जा रहे हैं, जिस पर प्रशासन तथा आम जनता का ध्यान नहीं है। इस प्रकार इस विषय के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चैनल लगातार कार्य कर रहा है। प्रशासन और श्मशानों तथा कब्रिस्तानों में दर्ज होने वाले आंकड़ें भी एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। 20 दिनों में इंदौर में करीब 200 से ज्यादा दाह संस्कार किए जा चुके हैं, लेकिन प्रशासन के आंकड़ें 100 लोगों के दाह संस्कार को ही उजागर कर रहे हैं। एक ओर हमारे देश में कोरोना मरीजों के साथ हो रहे अत्याचारों का जवाब देने वाला कोई नहीं है, वहीं दूसरी ओर रही सही कसर शवों को श्मशानों तथा कब्रिस्तानों तक पहुंचाने में एंबुलेंस चालक पूरी कर रहे हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों के शव मुक्तिधाम तक पहुंचाने के लिए स्वजनों को अधिक राशि चुकानी पड़ रही है। यह काम करने वाले एंबुलेंस चालक शव उठाने को लेकर मनमानी वसूली कर रहे हैं। शव को एंबुलेंस में रखने, श्मशान तक छोड़ने और अंतिम संस्कार करने के लिए 8 से 10 हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं। इसके बावजूद एक एम्बुलेंस में बेदर्दी से 6-6 शवों को भरकर श्मशानों तक पहुंचाया जा रहा है। कोरोना जैसी महामारी में कुछ लोगों ने इसे धंधा बना लिया है।


Troopel.com मुख्य्तः राजनीति, बुनियादी सेवाओं तथा सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित है। चैनल अपने दर्शकों के समक्ष खबरों के पीछे की सत्यता और सटीकता को तथ्यों को लाने में प्रतिबद्ध है। Troopel.com ऐसे मुद्दों पर निरंतर कार्य करता है, जिन पर किसी का ध्यान नहीं जाता है। श्मशानों तथा कब्रिस्तानों के बिगड़ते हालातों के प्रति प्रशासन को जागरूक करने के साथ ही Troopel.com धार्मिक स्थलों की पवित्रता, घुमंतू समाज को समान अधिकार एवं 2030 का भारत जैसे अति आवश्यक मुद्दों के लिए भी कार्यरत है।


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