हाथ में किताब लिए जंग से भागती हुई बच्ची की वायरल तस्वीर अफगानिस्तान की है? फैक्ट चेक

 अपनी जिंदगी के लिए जद्दोजहद करते अफ़ग़ानिस्तान के नागरिकों की हर रोज कोई ना कोई दर्द भरी तस्वीरें और विडियो वायरल हो रही है. इसी बीच सोशल मीडिया पर किताबें पकड़े एक बच्ची की तस्वीर वायरल हो रही है. तस्वीर से दिखता है की हाथ में किताब लिए ये बच्ची अपनी जान के साथ साथ अपने पढ़ने लिखने के सपने को भी बचाने की कोशिश कर रही है. साथ दावा किया जा रहा है कि बच्ची की तस्वीर अफ़ग़ानिस्तान की है जो तालिबान के डर से अपना घर छोड़ चुकी है. तो क्या सच में दिल को झंझोरती ये तस्वीर


अफ़ग़ानिस्तान से ही आई है? न्यूज़18 इंडिया की टीम ने इसकी पड़ताल की. तालिबान भले ही महिलाओं को शिक्षा का अधिकार देने और सुरक्षा मुहैया कराने के दावा करते हों लेकिन सत्ता पर काबिज होते ही उन्होंने महिलाओं के लिए कई कड़े नियम बना दिए हैं. इनमें घर से बाहर निकलना तो दूर, पढ़ना-लिखना भी उनके नियम के ख़िलाफ़ है. हाल ही में तालिबान ने अफगानिस्तान के एक स्कूल को नेस्तानाबूद कर दिया था. ऐसे में इस बच्ची की किताब लेकर भागते हुए तस्वीर ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या ये इसी ख़ौफ़ का हिस्सा है?  

न्यूज़18 इंडिया की फैक्ट चेक टीम ने तस्वीर को इंटरनेट पर खोजना शुरू किया जहां ये तस्वीर एक अरबी

वेबसाइट पर मिली. तस्वीर को 23 दिसंबर 2019 को वेबसाइट पर डाला गया था जिसके साथ लिखा गया है की ये तस्वीर 2014 में इज़राइल-गाज़ा के बीच हुई जंग के दौरान खींची गई थी. इज़राइल की सेना की तरफ़ से हुई बमबारी में इस बच्ची के घर को निशाना बनाया गया था जिस दौरान ये बच्ची अपनी किताबें लेकर भागती नज़र आई. इस दर्दनाक पल को फिलिस्तीनी फोटोग्राफर फदी थाबेट ने कैमरे में क़ैद कर लिया.  पड़ताल के दौरान हमें फोटोग्राफ़र का एक इंटरव्यू भी मिला जिसमे उन्होंने बताया कि इस तस्वीर को कई बार सोशल मीडिया को अलग अलग और ग़लत दावों के साथ वायरल किया जा चुका है. साथ ही उन्होने ये भी बताया कि कैसे उन्होने इस मासूम के दर्द को कैमरे के द्वारा महसूस किया.   न्यूज़18 इंडिया की पड़ताल से ये तो साफ़ है कि तस्वीर अफगानिस्तान की नहीं है बल्कि मासूम बच्ची की ये तस्वीर साल 2014 की है जो कि गाज़ा में ली गई है. न्यूज़18 इंडिया की पड़ताल में इस तस्वीर के साथ जो दावा किया जा रहा है वो ग़लत पाया गया है.