3 तलाक कानून और सियासी फायदे

लेखक-सनत कुमार जैन
3 तलाक बिल लोकसभा में पास हो गया है। बिल के समर्थन में 303 मत पड़े। वहीं विपक्ष में 84 मत पड़े। शेष सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया। बहुमत के आधार पर सियासी रंग ले चुका 3 तलाक का बिल लोकसभा से पास होकर राज्यसभा में भेजा जाएगा। राज्यसभा से यह बिल पास होगा या नहीं इसको लेकर अटकलें लग रही हैं। केन्द्र सरकार 2018 से 3 तलाक के मुद्दे पर अध्यादेश लाकर सियासत कर रही है। लोकसभा में यह बिल दूसरी बार पास हुआ है। इसके पूर्व भी लोकसभा में यह पास हो गया था। किन्तु राज्यसभा में स्वीकृति नहीं मिलने से कानून नहीं बन पाया था। जिसके कारण सरकार को बार-बार अध्यादेश जारी करने पड़े। लोकसभा में पुन: विधेयक प्रस्तुत करना पड़ा। 
3 तलाक के मुद्दे पर भाजपा ने बड़ी सियासी चाल चली है। पहली बार मुस्लिम समाज के बीच महिलाओं के माध्यम से भाजपा उनके बीच अपना प्रभाव जमाने में कामयाब हुई है। मुस्लिम समाज में महिला एवं पुरूषों के बीच बंटवारे का काम जिस खूबी के साथ भाजपा ने किया है। उससे भाजपा को दोहरा लाभ हो रहा है। भाजपा ने मुस्लिम परिवारों को महिला एवं पुरूषों के बीच बांट दिया है। भाजपा को युवा महिलाओं का समर्थन मिलने लगा है। भाजपा मुस्लिम वोट बैंक में सेध लगा दी है। वहीं 3 तलाक बिल को लेकर हिन्दू वोट प्रतिक्रिया स्वरूप भाजपा के पक्ष में कट्टरता के साथ एकजुट हुआ है। जिसका फायदा चुनाव में भाजपा को मिल रहा है। 


आम के आम और गुठलियों के दाम की तर्ज पर भाजपा के दोनों हाथों में लड्डू हैं। एक तरफ 3 तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं की सहानुभूति से मुस्लिम परिवारों में भाजपा की पैठ बड़ी तेजी के साथ बढ़ी है। वहीं 3 तलाक के बिल में 3 साल की सजा का प्रावधान और शिकायत होने पर तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजने के प्रावधान से कट्टरवादी हिन्दुओं के बीच यह संदेश पहुंच रहा है कि भाजपा ने 3 तलाक बिल लाकर मुस्लिम परिवारों के बीच विभाजन कराकर एक ही झटके में मुस्लिमों को कमजोर करने का काम किया है। यह काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही कर सकते हैं। इससे नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा का प्रभाव हिन्दुओं को संगठित करने का कारण बन रहा है।  


अगले कुछ माहों में कई विधानसभाओं के चुनाव होने हैं। 3 तलाक के मुद्दे पर भाजपा की झोली में हिन्दुओं के साथ-साथ मुस्लिमों के वोट की फसल भी काटने के लिए भाजपा ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत 3 तलाक के मुद्दे पर सियासी राजनीति को गर्माया है। विपक्षी दल 3 तलाक के मुद्दे पर जितना विरोध करेंगे। भाजपा का उतना ही ज्यादा फायदा होगा।  


3 तलाक कानून में सरकार ने 3 साल की सजा और शिकायत होने के साथ ही  आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजने के प्रावधान से कट्टरवादी हिन्दू बड़े उत्साहित हैं। लोकसभा चुनाव परिणाम ने भी यह सिद्ध कर दिया है, कि भाजपा के मुस्लिम वोट बैंक में बड़ा इजाफा हुआ है। जिससे उत्साहित होकर भाजपा रणनीतिकारों ने इस मुद्दे को और हवा दी है। भाजपा की इस रणनीति में औबैसी जैसे नेता आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। जिसके कारण 3 तलाक की यह आग और भड़क गई है। निश्चित रूप से विधानसभा चुनावों में इसका लाभ भाजपा को ही होने वाला है। 3 तलाक बिल, राष्ट्रीय नागरिकता कानून और आतंकवादी विरोधी कानून में संशोधन जैसे कानून के कारण मुसलमानों में देश भर में भय व्याप्त है। वहीं हिंदुओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कट्टरवादी हिन्दू छवि और मजबूत हुई है। 3 तलाक के मुद्दे पर जो सियासी हलचल मची है निश्चित रूप से इसका फायदा भाजपा को हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह की सोच और जोखिम भरी राजनीति के कारण ही भाजपा को वर्तमान में कहीं से चुनौती नहीं मिल पा रही है। कांगेस सहित अन्य विपक्षियों के पास भाजपा जैसे सोच और संगठन नही होने से भाजपा का मुकाबला करना विपक्षियों के लिए आसान नहीं है। हाल ही में राज्यसभा में बहुमत नहीं होते हुए भी सूचना अधिकार कानून को जो संशोधन केन्द्र सरकार ने पास करा लिया है। उससे विपक्षी हतप्रभ होकर रह गए हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा का मुकाबला करने की शक्ति विपक्षियों में नहीं है। जनता का समर्थन विपक्षी दलों से घट रहा है। 
27जुलाई /बी.पी.यादव 


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